Thursday, December 25, 2014

चन्दन-सा बदन चंचल चितवन- A tribute to Mukesh by pbchaturvedi

आप सभी को नववर्ष की बहुत बहुत बधाई  और  मंगलमय शुभकामनाएं....
मित्रों ! मैं अपने  प्रिय गायक मुकेश जी का एक गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ....
इस गीत का वास्तविक आनंद Youtube पर सुन कर ही आयेगा, इसलिए आपसे अनुरोध है कि आप मेरी मेहनत को सफल बनाएं और वहां इसे जरूर सुनें...
आप से अनुरोध है कि आप मेरे Youtube के Channel पर भी Subscribe और Like करने का कष्ट करें...


Chandan sa badan-A tribute to Mukesh by pbchaturvedi
Film- Saraswatichandra(1968)
Singer- Mukesh
Directed by Govind Saraiya
Starring -    Nutan, Manish
Music -     Kalyanji-Anandji
Cinematography-     Nariman A. Irani    
The film was based on Saraswatichandra, a Gujarati novel, by Govardhanram Madhavram Tripathi, set in 19th-century feudalism in India. It also won the National Film Awards in the Best Cinematography and Best Music Director categories.
(Some free pictures/paintings of Raja Ravi Verma are taken and used from http://commons.wikimedia.org in this video)

आप सभी को क्रिसमस की बहुत बहुत बधाई...

Sunday, December 7, 2014

जिस दिल में बसा था प्यार तेरा

मित्रों ! आज मुकेश जी का एक गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ, जो आशा है आपको पसंद आयेगी....
इस रचना का वास्तविक आनंद Youtube पर सुन कर ही आयेगा, इसलिए आपसे अनुरोध है कि आप मेरी मेहनत को सफल बनाएं और वहां इसे जरूर सुनें...


Sunday, October 26, 2014

श्री रामदरश मिश्र जी की एक कविता/कंचनलता चतुर्वेदी

मित्रों ! मैं आज से एक नै शुरुआत कर रहा हूँ | वह है- पुराने रचनाकारों की रचनाओं को कवितापाठ के जरिये आपतक पहुँचाना | इस क्रम में श्री रामदरश मिश्र जी की कविता श्रीमती कंचनलता चतुर्वेदी के स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ | आशा है पुराने रचनाकारों को सम्मान देने का यह तरीका आपको जरूर पसंद आयेगा |इस रचना का वास्तविक आनंद Youtube पर सुन कर ही आयेगा, इसलिए आपसे अनुरोध है कि आप मेरी मेहनत को सफल बनाएं और वहां इसे जरूर सुनें...
 

आंधियाँ भी चले और दिया भी जले

मित्रों ! एक रचना अपनी आवाज़ में  प्रस्तुत कर रहा हूँ, आशा है आप को अवश्य पसंद आयेगी...
इस रचना का वास्तविक आनंद Youtube पर सुन कर ही आयेगा, इसलिए आपसे अनुरोध है कि आप मेरी मेहनत को सफल बनाएं और वहां इसे जरूर सुनें...


आंधियाँ भी चले और दिया भी जले ।
होगा कैसे भला आसमां के तले ।

अब भरोसा करें भी तो किस पर करें,
अब तो अपना ही साया हमें ही छले ।

दिन में आदर्श की बात हमसे करे,
वो बने भेड़िया ख़ुद जंहा दिन ढले ।

आवरण सा चढ़ा है सभी पर कोई,
और भीतर से सारे हुए खोखले ।

ज़िन्दगी की खुशी बांटने से बढ़े ,
तो सभी के दिलों में हैं क्यों फासले ।

कुछ बुरा कुछ भला है सभी को मिला ,
दूसरे की कोई बात फ़िर क्यों खले ।


कृपया आप यहाँ अवश्य पधारें :-

श्री रामदरश मिश्र जी की एक कविता/कंचनलता चतुर्वेदी

Sunday, October 12, 2014

बड़ी मुश्किल है बोलो क्या बताएं...

अपनी आवाज़ में एक ग़ज़ल [ "मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन फ़ऊलुन" पर आधारित ] प्रस्तुत कर रहा हूँ...
इस रचना का वास्तविक आनंद Youtube पर सुन कर ही आयेगा, इसलिए आपसे अनुरोध है कि आप मेरी मेहनत को सफल बनाएं और वहां इसे जरूर सुनें...

  
बड़ी मुश्किल है बोलो क्या बताएं
न पूछो कैसे हम जीवन बिताएं।


अदाकारी हमें आती नही है,
ग़मों में कैसे अब हम मुस्कुराएं।


अँधेरा ऐसा है दिखता नही कुछ,
चिरागों को जलाएं या बुझाएं।


फ़रेबों,जालसाजी का हुनर ये,
भला खुद को ही हम कैसे सिखाएं।


ये माना मुश्किलों की ये घडी़ है,
चलो उम्मीद हम फिर भी लगाएं।


सियासत अब यही तो रह गई है,
विरोधी को चलो नीचा दिखाएं।


अगर सच बोल दें तो सब खफ़ा हों,
बनें झूठा तो अपना दिल दुखाएं।

Sunday, August 10, 2014

जब भी सोचूँ अच्छा सोचूँ /pbchaturvedi

मित्रों ! एक पूर्वप्रकाशित रचना अपनी आवाज में प्रस्तुत कर रहा हूँ , इस रचना का संगीत-संयोजन और चित्र-संयोजन भी मैंने किया है | आप से अनुरोध है कि आप मेरे Youtube के Channel पर भी Subscribe और Like करने का कष्ट करें ताकि आप मेरी ऐसी रचनाएं पुन: देख और सुन सकें | आशा ही नहीं वरन पूर्ण विश्वास है कि आप इस रचना को अवश्य पसंद करेंगे |
इस रचना का वास्तविक आनंद Youtube पर सुन कर ही आयेगा, इसलिए आपसे अनुरोध है कि आप मेरी मेहनत को सफल बनाएं और वहां इसे जरूर सुनें...
जब भी सोचूँ अच्छा सोचूँ।
मैं तो केवल इतना सोचूँ।

बालिग होकर ये मुश्किल है,
आओ खुद को बच्चा सोचूँ।

सोच रहे हैं सब पैसों की,
लेकिन मैं तो दिल का सोचूँ।

बातों की तलवार चलाए,
कैसे उसको अपना सोचूँ।

ऊपर वाला भी कुछ सोचे,
मैं ही क्योंकर अपना सोचूँ।

जो भी होगा अच्छा होगा,
मैं बस क्या है करना सोचूँ।

Tuesday, July 22, 2014

अमर गायक मुकेश के जन्मदिन पर....

मित्रों ! आज मेरे प्रिय गायकों में से एक मुकेश जी का जन्मदिन है | हालांकि मैं इस समय टान्सिल से परेशान हूँ पर पर इस दिन को ऐसे नहीं जाने दूंगा | इसलिए मुकेशजी का ये गीत आज प्रस्तुत कर रहा हूँ....


Sunday, June 29, 2014

दर्द दिलों के कम हो जाते....

शाम्भवी की आवाज़ में लीजिए एक नए फिल्म का ये गीत प्रस्तुत है...

Friday, May 30, 2014

बड़ी दूर से आये हैं....

मित्रों ! अपना एक मनपसंद गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ जो आशा है आप को भी पसंद होगा....

आप से अनुरोध है कि आप मेरे Youtube के Channel पर भी Subscribe और Like करने का कष्ट करें ताकि आप मेरी ऐसी रचनाएं पुन: देख और सुन सकें

Tuesday, May 27, 2014

बधाई/उफ़ ! ये समाचार चैनल...

        सबसे पहले तो प्रधानमंत्री मोदी जी और उनके मंत्रिमंडल को बधाई | देखते ही देखते अन्ततः मोदी की सरकार बन ही गयी | विरोधी बगले झांकते रह गए और भाजपा सत्ता में दस साल बाद पुनः वापस आ गयी | सच पूछिए तो ये जरूरी भी था | सत्ता का हस्तांतरण यदि इसी तरह कम से कम दस सालों में होता रहे तो कई चीजें अपने आप संतुलित हो जायेंगी | नेता मदांध होकर नहीं कुर्सी पर नहीं बैठेगे जैसा कांग्रेस के कुछ नेताओं के आचरण में दिख रहा था | कल जब सभी अपनी शपथ ले रहे थे तो मुझे मनमोहन सिंह जी की याद आ गयी | उन्होंने और उनके मंत्रिमंडल ने भी तो यह शपथ लिया था कि "जब ऐसा करना अपेक्षित न हो मैं कोई सूचना प्रकट नहीं करूंगा" पर क्या ऐसा हुआ ? उन्हें तो संविधान की और इस शपथ की परवाह किये बिना सूचनाओं को अपने सुपर बॉसद्वय को मजबूरी में बताना ही पड़ता था और इस बात कई बार प्रमाण हम सबको मिल ही चुके हैं | प्रधानमंत्री मोदी जी ने अपने पहले ही कुछ फैसलों में अपनी अलग एक झलक दिखाई है और पूरी उम्मीद है ये आगे भी बरक़रार रहेगा | सार्क देशों के सभी राष्ट्राध्यक्षों को बुलाना और अपनी पहली ही कैबिनेट मीटिंग में काला धन पर एस.आई.टी. बनाना ऐसे फैसले हैं जिनके असर दूरगामी हो सकते हैं |
        अब बात कुछ समाचार चैनलों की कर लें | ये बात-बात पर भारत और पाकिस्तान की जनता को आमने-सामने बिठाकर ऐसे प्रश्न पूछने लगते हैं मुझे उस समय इनकी समझ पर तरस आने लगता है | अब नवाज शरीफ ने देर से  भारत आने का फैसला क्यों लिया इसको वहां की जनता कैसे बता सकती है ? ऐसे कई प्रश्न मुझे बेतुके से लगे | इस कार्यक्रमों से ऐसा लग रहा था जैसे अभी युद्ध करवा कर ही ये मानेंगे और इन्हें  अपने या किसी भी देश की जनता की भावना से खिलवाड़ करने की छूट मिली हुई है | इन चैनलों को भी कुछ जिम्मेदारी समझनी चाहिए |

Monday, May 12, 2014

आप की जब थी जरूरत आप ने धोखा दिया

मित्रों ! एक रचना अपनी आवाज में प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे आप पहले पढ़ चुके हैं , इस रचना का संगीत-संयोजन भी मैंने किया है | आप से अनुरोध है कि आप मेरे Youtube के Channel पर भी Subscribe और Like करने का कष्ट करें ताकि आप मेरी ऐसी रचनाएं पुन: देख और सुन सकें | आशा ही नहीं वरन पूर्ण विश्वास है कि आप इस रचना को अवश्य पसंद करेंगे |
इस रचना का असली आनंद Youtube पर सुन कर ही आयेगा, इसलिए आपसे अनुरोध है कि आप मेरी मेहनत को सफल बनाएं और वहां इसे जरूर सुनें...

                                              सुनिए एक नई आडियो रिकार्डिंग

आप की जब थी जरूरत, आप ने धोखा दिया।
हो गई रूसवा मुहब्बत , आप ने धोखा दिया।


खुद से ज्यादा आप पर मुझको भरोसा था कभी;
झूठ लगती है हकीकत, आप ने धोखा दिया।


दिल मे रहकर आप का ये दिल हमारा तोड़ना;
हम करें किससे शिकायत,आप ने धोखा दिया।


बेवफ़ा होते हैं अक्सर, हुश्नवाले ये सभी;
जिन्दगी ने ली नसीहत, आप ने धोखा दिया।

पार करने वाला माझी खुद डुबोने क्यों लगा;
कर अमानत में खयानत,आप ने धोखा दिया।

Monday, May 5, 2014

Thursday, April 24, 2014

मतदान कीजिए/प्रांचन प्रणव चतुर्वेदी

इस चुनाव के मौसम में एक सन्देश अपने बेटे की आवाज़ में प्रस्तुत कर रहा हूँ | इसे आप YOUTUBE पर सुनने और Subscribe का कष्ट करें...

मतदान कीजिए सभी मतदान कीजिए
इस लोकतंत्र पर्व का सम्मान कीजिए

संसद में जो भी जाए वो आदमी अच्छा हो,
हर शख्स से ये आप आह्वान कीजिए

मतदान करना है जरूरी दान की तरह,
किसी पात्र व्यक्ति को ही ये दान कीजिए

अपराधी आ रहे हैं राजनीति में बहुत,
पूरे न आप उनके अरमान कीजिए

Thursday, April 10, 2014

भूली हुई यादों...

       मित्रों  ! मेरे  प्रिय गायकों में से एक रहे हैं- मुकेश | इनका गाया हुआ एक गीत अपनी आवाज़ में प्रस्तुत कर रहा हूँ | आप इसे सुने और बतायें कि मेरा यह प्रयास कैसा रहा ? साथ ही यू-ट्यूब पर इसे LIKE या SUBSCRIBE करने का भी कष्ट करें.....


Monday, April 7, 2014

भजन :- जय जय जय हे दुर्गे देवी

नवरात्रि के अवसर पर  दुर्गा जी का एक भजन प्रस्तुत कर रहा हूँ | आप इसे सुनें और भक्ति में डूब जाएँ......


आप सभी को रामनवमी की शुभकामनायें.....

Monday, March 24, 2014

चुनाव का मौसम

        आजकल चुनाव का मौसम क्या खूब चल रहा है ! जिसे देखिये इसी की चर्चा है | कांग्रेस को कुछ जानकार इस बार पिटा हुआ मोहरा मान रहे हैं तो कुछ लोग अभी भी केजरीवाल राग अलाप रहे हैं | इन सबमें जो पार्टी आगे नज़र आ रही है, वो भाजपा है | मोदी इस समय अपने प्रतिद्वंदियों से काफी आगे दिख रहे हैं, मगर कुछ बातें जो पार्टी के अन्दर घट रही हैं; वो इस लोकप्रियता को सत्ता के सिंहासन तक ले जाने में रुकावट न बन जाएं | सबसे अहम् बात है पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं का टिकट न मिलने पर रूठना और बागी तेवर अपनाना | हालांकि इनमें से कई नेता टिकट के स्वाभाविक उम्मीदवार थे | जसवंत सिंह, हरेन पाठक, लालजी टंडन, लालमुनी चौबे, नवजोत सिंह सिद्धू आदि को टिकट न मिलना इस बात का प्रमाण है की भाजपा के अन्दर सब-कुछ ठीक नहीं है | भले ही सब कुछ रणनीति के अंतर्गत किया गया हो, पर कम से कम इन नेताओं को विश्वास में जरूर लेना चाहिए था | एक तरफ जहां भाजपा में दूसरे दलों से आने के लिए होड़ मची है और जो नेता आ रहे हैं उन्हें टिकट मिलना और दूसरी तरफ पार्टी के पुराने नेताओं की अवहेलना करना निसंदेह पार्टी के लिए उचित नहीं है | कहीं इसके पीछे ये तो नहीं कि जो नेता बाद में किसी बात पर अडंगा लगा सकते हैं, उन्हें पहले ही रास्ता दिखाया जा रहा है !
       अब अन्य पार्टियों की भी बात कर लें | कांग्रेस पार्टी के कई वरिष्ठ नेता जैसे जगदम्बिका पाल, सतपाल महाराज, सोनाराम आदि कांग्रेस छोड़ भाजपा का दामन थाम चुके हैं | कई नेता चुनाव से परहेज कर रहे थे पर हाईकमान के दबाव में मैदान में उतर रहे हैं | टिकट की मारामारी यहाँ उतनी नहीं है जितनी भाजपा और आम आदमी पार्टी में है | आप आदमी पार्टी में टिकट के लिए कई जगह इनके अपने ही कार्यकर्ता नाराज़ है और वे पैसे लेकर टिकट बेचने का आरोप लगा रहे हैं | तीसरा मोर्चा इस बार भी फुसफुसा रहा है पर इसका वास्तविक अंजाम तो चुनाव बाद ही पता लगेगा |
      सबसे रोचक बात ये है कि जो नेता कल किसी अन्य दलों से दूसरे दल या पार्टी में शामिल हुए हैं, उनकी भाषा अचानक बदलना | कल तक जिसे गालियाँ देते, आरोप लगाते थकते नहीं थे और टी.वी. चैनलों पर तमाम बुराइयां गिनाते थे; आज उनकी तारीफ़ में खूब कसीदे पढ़ रहे हैं | इतनी जल्दी और एकाएक ह्रदय-परिवर्तन तो डाकू अंगुलिमाल का भी नहीं हुआ था | वाह! इस चुनावी मौसम का जनता खूब आनंद ले रही है | चलिए हम सभी मिलकर कहते हैं - लोकतंत्र की जय.....

Sunday, March 16, 2014

हास्यकविता/ जोरू का गुलाम

     मित्रों ! होली के अवसर पर एक हास्य - कविता का आडियो प्रस्तुत कर रहा हूँ | मजे की बात ये है कि ये रचना मैंने उस समय लिखी थी जब अभी मेरी शादी नहीं हुई थी | आशा है आप को ये जरूर पसंद आयेगी.....
                        आप सभी को होली की शुभकामनाएं...
      इस रचना का असली आनंद सुन कर ही आयेगा, इसलिए आपसे अनुरोध है कि नीचे दिए गए लिंक पर इसे जरूर सुनें | आप से अनुरोध है कि आप मेरे Youtube के Channel पर भी Subscribe और Like करने का कष्ट करें...

भयवश नहीं परिस्थितिवश मैं करता हूँ सब काम।
फ़िर भी लोग मुझे कहते हैं जोरू का गुलाम.......।

सुबह अगर बीबी सोई हो, चाय बनाना ही होगा;
बनी चाय जब पीने को तब उसे जगाना ही होगा;
चाय बनाना शौक है मेरा हो सुबह या शाम.......
फ़िर भी लोग मुझे कहते हैं जोरू का गुलाम.......।

मूड नहीं अच्छा बीबी का फ़िर पति का फ़र्ज है क्या;
बना ही लेंगे खाना भी हम आखिर इसमें हर्ज है क्या;
इसी तरह अपनी बीबी को देता हूँ आराम.....
फ़िर भी लोग मुझे कहते हैं जोरू का गुलाम.......।

वो मेरी अर्धांगिनी है इसमें कोई क्या शक है;
इसीलिये तनख्वाह पे मेरे केवल उसका ही हक है;
मेरा काम कमाना है बस खर्चा उसका काम.....
फ़िर भी लोग मुझे कहते हैं जोरू का गुलाम.......।

                          आप सभी को होली की शुभकामनाएं...

Saturday, March 1, 2014

भारत की कमजोर गेंदबाजी का सच


          आजकल भारतीय क्रिकेट टीम एक नए दौर से गुजर रही है | टीम में नए खिलाड़ी ज्यादा हैं जो कुछ समय बाद ही अनुभव के साथ परिपक्व होंगे | लेकिन एक बात जो गौर करने वाली है वह है टीम में अच्छे तेज गेंदबाजों का अभाव | आखिर इसकी वजह क्या है ? एक बड़ी वजह है आई.पी.एल. | देश के कई गेंदबाज अब केवल आई.पी.एल. के लिए खेलकर इतना कमा रहे हैं कि उनके लिए अब देश महत्वपूर्ण नहीं रह गया है | वे आई.पी.एल. के समय एकदम ठीक रहते हैं पर भारत की टीम के लिए अनफिट रहते हैं, उन्हें चोट लगी होती है | एक नाम नहीं है -प्रवीण कुमार, इरफान खान, आर.पी.सिंह, मुनाफ पटेल, गोनी आदि कई ऐसे खिलाड़ी है | बल्लेबाजी में तो गनीमत है पर गेंदबाजी में भारत के पिछड़ने का यही मुख्य कारण अब नज़र आ रहा है | देश के बेहतरीन तेज गेंदबाज अब भारत के टीम में नहीं आना चाहते हैं क्योकि कम समय में खेलकर जब ज्यादा पैसा  मिल रहा हो तो कोई साल भर पसीना क्यों बहाए ?  कपिलदेव , श्रीनाथ, चेतन शर्मा, मदन लाल , रोजर बिन्नी, मनोज प्रभाकर, करसन घावरी आदि जैसे तेज गेंदबाज कहां है जो अपना पूरा दमखम देश के लिए लगा दें | एकदिवसीय मैचों में तो अंतिम ओवरों में आजकल बुरा हाल होता है | गेंदबाज पिटते रहते हैं  और  यार्कर, स्लो बाल आदि वेरिएशन के बदले गुडलेंथ बाल या फुलटास फेकते रहते हैं | कई बार तो क्षेत्ररक्षण के अनुसार ही बाल नहीं होती | बालिंग कोच क्यों रखे गए हैं, ये पूछनेवाला कोई नहीं है | आई.पी.एल. में फिक्सिंग का अलग ही गुल खिला हुआ है जिसकी वजह से श्रीसंत जैसे कई खिलाडियों ने स्वयं अपनी ज़िंदगी तबाह कर ली है | क्या कोई रास्ता बचा है जो इस खेल को देशप्रेम से जोड़ते हुए आगे ले जाएगा ? खिलाड़ी, कोच, बोर्ड अपनी जिम्मेदारी कब समझेंगे ? मेरे ख्याल से जो खिलाड़ी देश के लिए अनफिट हो और केवल आई.पी.एल. के लिए फिट होकर अवतरित होता हो उसपर रोक लगनी चाहिए तभी भारत की गेंदबाजी में सुधार हो सकता है अन्यथा केवल बचे-खुचे खिलाड़ियों के दम पर टेस्ट श्रृंखला या कोई कप जीतना बहुत मुश्किल होगा और कभी जीत भी गए तो ये संयोग मात्र ही होगा | आप का क्या विचार है ?

Tuesday, February 11, 2014

प्रतिदिन एक बवाल + मीडिया कवरेज = सत्ता प्राप्ति

            आजकल टीवी पर प्रतिदिन एक ही चर्चा है-आम आदमी पार्टी और उससे जुड़े रोज़ एक बवाल | यह पार्टी जितनी तेजी से ऊपर उठी उतनी तेजी से गर्त में जाने को आतुर दिख रही है क्योकि इसे बड़ी जल्दी है |  लोकसभा चुनाव जो है | इस काम में लगभग सारे मीडिया चैनलों का पूर्ण समर्थन प्राप्त है | ये जिसे चाहे, जब चाहे चोर कह सकते हैं, खुद पर सवाल पूछने पर भी बिकाऊ करार दे सकते हैं ; राजनीति की इतनी गिरी हुई हालत कभी देखने को नहीं मिला है |
आइये इनके बारे में देखते हैं-
पृष्ठभूमि :- सभी जानते है कि यह पार्टी अन्ना आन्दोलन से उभरी है और उस समय तक इसका चरित्र स्वच्छ और ईमानदार  था, पर चुनावी पार्टी बनते ही और सत्ता-प्राप्ति के बाद सबकुछ बदल गया है| अब इसका वास्तविक मकसद सेवा भावना, भ्रष्टाचार या अन्य  कुछ नहीं रह गया है |  इससे अब जुड़ने वालों का एक ही मकसद है, इससे जुड़कर विधायक या सांसद हो जाना | बाकी दलों में लोग वर्षों मेहनत करके आते हैं, तब कहीं यह सुख नसीब होता है, पर इसमें तो दिल्ली का उदाहरण दिख रहा है | अंधे के हाथ बटेर कभी भी लग सकती है|

प्रतिदिन एक बवाल + मीडिया कवरेज :- झूठ बोलना, दूसरो को चोर खुद को ईमानदार कहना इनके प्रिय शगल हैं | साथ ही प्रतिदिन एक बवाल की स्थिति पैदा करना ताकि टीवी पर हर चैनल में ये दिखे, बहस में भाग लें | जबसे दिल्ली में सरकार बनी है; कोई ऐसा दिन नहीं होगा जब ये न हुआ हो | आप ने देखा होगा टीवी पर जब इनके सदस्य बोलते हैं तो बाकी सभी चुप रहते हैं, पर कोई भी दूसरा जब बोलता है तो ये उसे हमेशा टोकते रहते हैं, हर बात को घुमाते हैं और सीधा जवाब कभी नहीं देते | इनके साथ मीडिया तो है ही क्योकि कार्यक्रम की शुरुआत में कुछ और मुद्दा होता है पर एंकर भी अंत में इन्हीं को सही और बाकी सबको गलत साबित करने की कोशिश करते हैं | आजतक, आईबीएन सेवेन, ए बी पी न्यूज या कोई भी न्यूज चैनल ( एकाध को छोड़कर) ले लीजिए सभी इनके रंग में रंगे नज़र आते हैं | दरअसल ये सभी मिलकर जनता को मूर्ख साबित करने पर तुले हुए है | इनकी वजह से अब तो न्यूज चैनल लगाने को जी नहीं करता |

अब तक का काम :- इन्होनें अब तक कुछ घोषणाएं ही की हैं जो कितनी अव्यवहारिक हैं इसका पता कुछ समय बाद ही चलेगा, इसलिए अब जल्दी से अपनी सरकार खुद गिराकर भाग जाना चाहते हैं ताकि दोष औरों को दे सकें और शहीद बनकर लोकसभा के चुनाव में उतर सकें, जनता तो मूर्ख है ही |

         ( मैं किसी पार्टी का सदस्य नहीं हूँ, न तो आम आदमी पार्टी का विरोधी हूँ || ये बताना इसलिए आवश्यक है क्योंकि किसी पार्टी से प्रेरित लेख भी ये कह सकते हैं |  मैं वास्तविक आम आदमी हूँ जिसने अपनी आँखे खोल रखी हैं |)

Sunday, January 26, 2014

मेरा नाम करेगा रोशन...

        आप सभी को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं... इस अवसर पर आज मन्ना डे जी का गाया यह मशहूर गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ.....शायद शहीद देशभक्तों ने भी भावी पीढ़ी के बारे में यही सोचा होगा... है न !


Monday, January 6, 2014

A love song-कुछ हमसे सुनो कुछ हमसे कहो

मित्रों ! नववर्ष की पहली सौगात के रूप में यह प्रेमगीत प्रस्तुत कर रहा हूँ | आशा है हमेशा की तरह आप इसे भी पसंद करेंगे.....
इस रचना का असली आनंद Youtube पर सुन कर ही आयेगा, इसलिए आपसे अनुरोध है की आप मेरी मेहनत को सफल बनाएं और वहां इसे जरूर सुनें...

कुछ हमसे सुनो कुछ हमसे कहो।
चाँदनी रात है, ऐसे चुप ना रहो। 


हर जगह भीड़ है हर जगह लोग हैं,
ऐसी तनहाई मिलती है जल्दी नहीं;
जहाँ कोई न हो जहाँ कोई न हो........
चाँदनी रात है, ऐसे चुप ना रहो.........


बडी़ मुश्किल से फ़ुरसत के पल आते हैं,
होके चुप इन पलों को न जाया करो;
प्यार के इस समुन्दर में आओ बहो......
चाँदनी रात है, ऐसे चुप ना रहो...........


लब अगर बात करने से कतरा रहे,
बात करने की तरकीब यूं सीख लो;
अपनी नज़रों से मेरी नज़र में कहो......
चाँदनी रात है, ऐसे चुप ना रहो............


अगर गीत पसंद आया तो यूट्यूब पर मुझे जरूर Subscribe और Like करें...