Tuesday, September 20, 2016

देश के शहीदों के नाम एक भोजपुरी गीत

मार के भगाव एके मार के भगाव |      { इसको (पाकिस्तान) को मार के भगाओ}
पाकिस्तान ससुरा के मार के भगाव |

कुकुर के पोंछ ह ई सोझ नाही होई,  { ये कुत्ते की पूंछ है जो कभी सीधी नहीं होगी}
आगे से दुनिया के ई बोझ नाही होई,  {अब ये दुनिया का बोझ अब दुनिया में नहीं रहेगा }
पागल भइल बा इ त मारि के मुआव........{ये पागल हो गया है इसे जान से मार दो }

सालन से देखत-देखत मन अऊँजाइल, {सालों से देखते-देखते हमारा मन परेशान हो गया है}
नेतवन के काहें नाहीं अबो ना बुझाइल,  {पता नहीं नेताओं को ये बात अभी भी समझ में  क्यों  नहीं आ रही}
अपना जवानन के अब ना गवांव.......{ कि अब वे अपने जवान ( सैनिकों ) को अब ना गवाएं }

Tuesday, August 30, 2016

शाश्वत कृष्णायन का विमोचन

         दिनांक 27-8-2016 को मेरे पिताजी श्री मदन मोहन चतुर्वेदी की पुस्तक "शाश्वत कृष्णायन" का विमोचन (लोकार्पण) श्रृंगेरी मठ, महमूरगंज वाराणसी में श्री महेंद्रनाथ पांडेय मानव संसाधन राज्यमंत्री, भारत सरकार द्वारा संपन्न हुआ। इसके पूर्व पिताजी "शाश्वत रामायण" की रचना भी कर चुके हैं जिसका लोकार्पण तत्कालीन सर संघचालक श्री कुप्पाहाली सीतारमय्या सुदर्शन  जी ने 2006 में किया था |
          बाएं से पंडित मदन मोहन चतुर्वेदी (रचनाकार), केंद्रीय ब्राह्मण महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री सतीशचंद्र मिश्र, मानव संसाधन राज्यमंत्री डा. महेंद्र नाथ पांडेय, काशी विद्वत परिषद् के अध्यक्ष महामहोपाध्याय प्रो. रामयत्न शुक्ल और संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. यदुनाथ दूबे जी शाश्वत कृष्णायन के विमोचन के दौरान......

कार्यक्रम के प्रारम्भ में मुख्य अतिथि दीप प्रज्ज्वलन करते हुए (ऊपर)...... 
नीचे कार्यक्रम और मंच पर उपस्थित विद्वतजनों के कुछ अन्य फोटो....







Monday, April 11, 2016

मेरी माँ......

दिनांक 24-3-16 को मेरी माँ इस नश्वर संसार को छोड़कर हमेशा के लिए मुझसे दूर चली गयीं | बचपन से लेकर अबतक की सारी बातें चलचित्र की तरह बार बार घूम जाती हैं | मेरी माँ मेरी सबसे अच्छी मित्र भी थी जिनसे मैं सबकुछ कह सकता था | अब ऐसा शायद कोई नहीं...| मुझे बहुत दुःख है कि अंतिम पलों में मैं उनके साथ नहीं था और न बात हो पाई  | माँ  ! तुम मुझे बहुत याद आओगी......काश ! तुम नहीं जाती.........
मेरी माँ ने भी बहुत से भजन और गीत लिखे हैं जिन्हें वह खुद तन्मय होकर गाती थीं | इन्हीं में से एक छठ गीत आप पहले भी सुन चुके हैं जिसका लिंक है -छठ गीत/रचना-श्रीमती शैलकुमारी चौबे

Monday, February 29, 2016

ये भला क्यों कभी नहीं होता

एक ग़ज़ल [ "फाइलातुन मुफ़ाइलुन फेलुन" पर आधारित ] प्रस्तुत कर रहा हूँ | आशा है आप अवश्य पसंद करेंगे....... 

ये भला क्यों कभी नहीं होता |
हर कोई आदमी नहीं होता |

कुछ गलत लोग भी तो होते हैं,
हर कोई तो सही नहीं होता |

जो न सोचा वो बात होती है,
जो भी सोचा वही नहीं होता |

दिल को भी देख लो जरा उसके,
सिर्फ चेहरा हसीं नहीं होता |

क्यों गलत बात को सही कह दें,
हमसे तो बस यही नहीं होता |

कुछ न कुछ की कमी सभी को है,
क्यों कोई भी धनी नहीं होता |

Tuesday, January 26, 2016

मेरे सपनों का भारत तो भारत ऐसा भारत है

आज गणतंत्र दिवस के अवसर पर एक देशभक्ति-पूर्ण रचना प्रस्तुत है जिसमें मैंने 'अपना भारत कैसा हो' ये परिकल्पना की है :-

हर तरफ अमन है जहाँ हर जगह मुहब्बत है |
मेरे सपनों का तो भारत ऐसा भारत है |

हर पुरुष को काम है मिला, कोई भी बिन काम का नहीं,
हर नारी है पढ़ी-लिखी जैसे कि जरुरत है |

धर्म, जाति, सम्प्रदाय पर अब हम नहीं लड़ रहे,
हर भाषा, उपभाषा की एक जैसी इज्जत है |

चोट एक को भी लगे दर्द तो सभी को हो,
दूसरों का दर्द बांटना अब सभी की आदत है |

आँख ना दिखाए कोई मिल-मिल के काम हो सभी,
देश हो, पड़ोसी हो या कि फिर सियासत हो |

कोख में न बेटियाँ मरें जाए हर जगह बिना डरे,
अपहरण, लूट, छेड़ से सबकी अब हिफाजत है |

आप सभी को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं...

Thursday, December 31, 2015

यादों की महफ़िल सजाए बैठा हूँ (संगीतमय)

सभी ब्लॉगर मित्रों को नववर्ष 2016 की शुभकामनाएं...
मित्रों ! यह साल जाने को है और नया साल आने वाला है | आज अपनी एक बहुत पुरानी रचना प्रस्तुत कर रहा हूँ  | आशा है आप इसे भी अवश्य पसंद करेंगे.......

यादों की महफ़िल सजाए बैठा हूँ |
अपनी हर मुश्किल भुलाए बैठा हूँ |

यादें उनकी आती हैं वे आते नहीं,
जिनसे अपना दिल लगाए बैठा हूँ |

जब दुनिया रोती है आंसू बहते हैं,
ऐसे मैं खिलखिलाए बैठा हूँ |

कोई भी आ जाए मैं अपना लूंगा,
सबसे अपना दिल मिलाए बैठा हूँ |

यादों के दम से ही ये अपना जीवन,
जीने के काबिल बनाए बैठा हूँ |

इस महफ़िल में सबका आना-जाना है,
मैं तो सबको ही बुलाए बैठा हूँ |



सभी ब्लॉगर मित्रों को नववर्ष 2016 की शुभकामनाएं...

Sunday, November 22, 2015

तूने आने में की जो देरी तो....(नई रिकार्डिंग)

आज अपने जन्मदिन पर मैं सभी मित्रों को आने का निमंत्रण दे रहां हूँ | अगर.......( शेष YOUTUBE पर सुनिए..) 
तूने आने में की जो देरी तो।
याद आने लगेगी तेरी तो।

मैं इल्जाम तुम्हें ही दूंगा,
मेरी दुनिया हुई अंधेरी तो।

ढूंढता हूँ तुझे मंजिल-मंजिल,
ख़त्म होगी कभी ये फेरी तो।

करूँगा और इन्तज़ार अगर,
जान जाने लगेगी मेरी तो।