Monday, April 11, 2016

मेरी माँ......

दिनांक 24-3-16 को मेरी माँ इस नश्वर संसार को छोड़कर हमेशा के लिए मुझसे दूर चली गयीं | बचपन से लेकर अबतक की सारी बातें चलचित्र की तरह बार बार घूम जाती हैं | मेरी माँ मेरी सबसे अच्छी मित्र भी थी जिनसे मैं सबकुछ कह सकता था | अब ऐसा शायद कोई नहीं...| मुझे बहुत दुःख है कि अंतिम पलों में मैं उनके साथ नहीं था और न बात हो पाई  | माँ  ! तुम मुझे बहुत याद आओगी......काश ! तुम नहीं जाती.........
मेरी माँ ने भी बहुत से भजन और गीत लिखे हैं जिन्हें वह खुद तन्मय होकर गाती थीं | इन्हीं में से एक छठ गीत आप पहले भी सुन चुके हैं जिसका लिंक है -छठ गीत/रचना-श्रीमती शैलकुमारी चौबे

Monday, February 29, 2016

ये भला क्यों कभी नहीं होता

एक ग़ज़ल [ "फाइलातुन मुफ़ाइलुन फेलुन" पर आधारित ] प्रस्तुत कर रहा हूँ | आशा है आप अवश्य पसंद करेंगे....... 

ये भला क्यों कभी नहीं होता |
हर कोई आदमी नहीं होता |

कुछ गलत लोग भी तो होते हैं,
हर कोई तो सही नहीं होता |

जो न सोचा वो बात होती है,
जो भी सोचा वही नहीं होता |

दिल को भी देख लो जरा उसके,
सिर्फ चेहरा हसीं नहीं होता |

क्यों गलत बात को सही कह दें,
हमसे तो बस यही नहीं होता |

कुछ न कुछ की कमी सभी को है,
क्यों कोई भी धनी नहीं होता |

Tuesday, January 26, 2016

मेरे सपनों का भारत तो भारत ऐसा भारत है

आज गणतंत्र दिवस के अवसर पर एक देशभक्ति-पूर्ण रचना प्रस्तुत है जिसमें मैंने 'अपना भारत कैसा हो' ये परिकल्पना की है :-

हर तरफ अमन है जहाँ हर जगह मुहब्बत है |
मेरे सपनों का तो भारत ऐसा भारत है |

हर पुरुष को काम है मिला, कोई भी बिन काम का नहीं,
हर नारी है पढ़ी-लिखी जैसे कि जरुरत है |

धर्म, जाति, सम्प्रदाय पर अब हम नहीं लड़ रहे,
हर भाषा, उपभाषा की एक जैसी इज्जत है |

चोट एक को भी लगे दर्द तो सभी को हो,
दूसरों का दर्द बांटना अब सभी की आदत है |

आँख ना दिखाए कोई मिल-मिल के काम हो सभी,
देश हो, पड़ोसी हो या कि फिर सियासत हो |

कोख में न बेटियाँ मरें जाए हर जगह बिना डरे,
अपहरण, लूट, छेड़ से सबकी अब हिफाजत है |

आप सभी को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं...

Thursday, December 31, 2015

यादों की महफ़िल सजाए बैठा हूँ (संगीतमय)

सभी ब्लॉगर मित्रों को नववर्ष 2016 की शुभकामनाएं...
मित्रों ! यह साल जाने को है और नया साल आने वाला है | आज अपनी एक बहुत पुरानी रचना प्रस्तुत कर रहा हूँ  | आशा है आप इसे भी अवश्य पसंद करेंगे.......

यादों की महफ़िल सजाए बैठा हूँ |
अपनी हर मुश्किल भुलाए बैठा हूँ |

यादें उनकी आती हैं वे आते नहीं,
जिनसे अपना दिल लगाए बैठा हूँ |

जब दुनिया रोती है आंसू बहते हैं,
ऐसे मैं खिलखिलाए बैठा हूँ |

कोई भी आ जाए मैं अपना लूंगा,
सबसे अपना दिल मिलाए बैठा हूँ |

यादों के दम से ही ये अपना जीवन,
जीने के काबिल बनाए बैठा हूँ |

इस महफ़िल में सबका आना-जाना है,
मैं तो सबको ही बुलाए बैठा हूँ |



सभी ब्लॉगर मित्रों को नववर्ष 2016 की शुभकामनाएं...

Sunday, November 22, 2015

तूने आने में की जो देरी तो....(नई रिकार्डिंग)

आज अपने जन्मदिन पर मैं सभी मित्रों को आने का निमंत्रण दे रहां हूँ | अगर.......( शेष YOUTUBE पर सुनिए..) 
तूने आने में की जो देरी तो।
याद आने लगेगी तेरी तो।

मैं इल्जाम तुम्हें ही दूंगा,
मेरी दुनिया हुई अंधेरी तो।

ढूंढता हूँ तुझे मंजिल-मंजिल,
ख़त्म होगी कभी ये फेरी तो।

करूँगा और इन्तज़ार अगर,
जान जाने लगेगी मेरी तो।

Wednesday, November 18, 2015

आप कहते हैं हमसे ग़ज़ल छेड़िए

मैंने यह रचना ऐसे समय के लिए लिखा है जब गायक से किसी ग़ज़ल की फ़रमाइश हो रही है किन्तु वह दुखी है......उसके मन की व्यथा इस रचना में आप यहाँ पढ़िए और YOUTUBE पर सुनिए.....

आप कहते हैं हमसे ग़ज़ल छेड़िए, कब तलक हम ग़ज़ल यूं सुनाते रहें |
अपने खोए हुए यार की याद से, कब तलक गम की शम्मा जलाते रहें |

ज़िंदगी ने हसीं हमको धोखा दिया,
पहले हमको मुहब्बत का मौका दिया,
फिर जुदाई की तनहाइयां आ गयीं, जिनको हम महफ़िलों में छुपाते रहे......

मेरे दिल में है गम चेहरे पे हँसी,
आप समझेंगे क्या मेरी ये बेबसी,
आप समझेंगे इसको भी मेरी अदा, गाते-गाते जो हम मुस्कुराते रहे.....

हर्फ़ अश्कों के हैं सुर मेरी आह के,
आप कैसे सुनेंगे इन्हें चाह से,
रो पड़ा गाते-गाते आप क्या जाने क्यों, आप तो तालियाँ बस बजाते रहे.....
 

Monday, November 16, 2015

दर्शन दो प्रभु कबसे खड़े हैं

आप के लिए एक अपने लिखे भजन की नई रिकार्डिंग प्रस्तुत कर रहा हूँ जो आशा है आप अवश्य पसंद करेंगे.....